दास्तान

कहने को बाकी है क्या

इश्क की दास्तान

आपके और मेरे

दिल के यूँ दरम्याँ
       होश में आकर भी

       खुद को भूले सनम

       आपकी इन अदाओं

       से भटके से है् कुछ हमारे कद़म
धुंध की बदलियाँ

आज हल्की हुई्

आपसे जब मुझे

यूँ मोहब्बत हुई
     दिल के हारे 

     हम मारे

     आपकी रहमतों पे कहीं

     आकर ठहरे दर पे आपके दिलनशी़ं
जश्न है आपसे ही

और आपसे ही दुआ

दिल की गहराइयों में

आप ही हो बसे
     मेरे लफ्ज़ आप हो

     आप ही आवाज़ भी

     हवाओं का संगीत आप हो

     और दिन का आगाज़ भी

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16 thoughts on “दास्तान

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