तुझसे चाहत है मुझे…

तुझसे चाहत है मुझे

मेरे महबूब इस कदर

मेरे होश कर गई फ़ना

तेरी वो एक नज़र


एज़ाज तेरे एहसास का, और फिर वो आलम हुआ

नाज़नीन तू और मैं तेरा कायल हुआ

सादगी से तेरी, हुई मुझको ये उल्फ़त

तुझसे चाहत है मुझे

मेरे महबूब इस कदर


आबे बाराँ की तरह बरसी

वो मुस्कुराहट तेरी

लाज़मी है मुझे

एक आहट तेरी

वस्ल की आस में

ना अब ये झपके पलक

तुझसे चाहत है मुझे

मेरे महबूब इस कदर


आसमाँ के उस छोर से

तेरे जिस्म के हर पोर से

यासमीन की तरह

एक महक जो उठी

मैं कैसे करू बयाँ फिर इस दिल का हाल

जिसके हर कोने से

इश्क की मौजें उठी


तुझसे मुझे एतबार

तुझसे मेरे शामों, सहर

तुझसे चाहत है मुझे

मेरे महबूब इस कदर


हुमां तू और मैं तेरा अफ़साना

शमां तू और मैं तेरा परवाना

गुस्ताख़ तेरी अदाएँ

उस पर गुलशन तू, और मैं किसी महताब़ की तरह

वस्फ़ है ये तुझमे या कोई इति्तफाक है तू मेरे हमदम

कर ले मुझे इख़तियार किसी आफ़ताब की तरह


राहत दे तू मुझे

बन जा मेरी हमसफर

तेरे लिए रोक दूँ

मैं ये चारों पहर

तुझसे चाहत है मुझे

मेरे महबूब इस कदर….
VOCABULARY-

एजा़ज- miracle

नाज़नीन- beautiful

आबे बाराँ- rain water

वस्ल- meeting

हमां- a bird of good luck

वस्फ़- quality

इख़तियार- to choose

महताब़- the moon

आफ़ताब- the sun

Image credit- google.

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17 thoughts on “तुझसे चाहत है मुझे…

  1. बहुत पहले ही मालूम था जान-ए-जहाँ,
    तुझे मुझसे बेपन्हा चाहत है.!
    ये और बात रही देख ‘सागर’ को तुझे,
    इंकार करने की आदत है.!!

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